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Vedic Rituals
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गणपति पूजा करने से जीवन में ज्ञान, धन, सुख-समृद्धि और यश की वृद्धि होती है, साथ ही सभी प्रकार
की बाधाएं और कष्ट दूर होते हैं. गणेश जी को विघ्नहर्ता माना जाता है, जो सभी प्रकार की
रुकावटों को दूर करते हैं और भक्तों को सही दिशा में ले जाते हैं. गणपति पूजा के प्रमुख लाभ||
1. बाधाओं का नाश:-
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है, इसलिए उनकी पूजा करने से जीवन की सभी रुकावटें और बाधाएं
दूर हो जाती हैं.
ज्ञान और बुद्धि की प्राप्ति:
2. सुख-समृद्धि और धन लाभ:-
गणेश जी रिद्धि-सिद्धि के दाता हैं. उनकी पूजा से घर में सुख-समृद्धि आती है, आर्थिक स्थिति
मजबूत होती है और धन संबंधी परेशानियां दूर होती हैं.
3. सकारात्मकता और सफलता:
गणेश पूजा से जीवन में सकारात्मकता और खुशहाली आती है. उनके आशीर्वाद से हर कार्य में सफलता
प्राप्त होती है.
4. ग्रह दोष निवारण:
जिन लोगों की कुंडली में बुध ग्रह कमजोर होता है या बुध संबंधी कोई दोष होता है, उन्हें बुधवार
को गणेश जी की पूजा करने से लाभ मिलता है, जिससे ग्रह के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं.
रुद्राभिषेक पूजा हिंदू धर्म में भगवान शिव को समर्पित एक प्रमुख पूजा है, जिसके माध्यम से भगवान
शिव की अराधना की जाती है। धर्मशास्त्रों एवं पुराणों में प्राप्त रुद्राभिषेक पूजा अत्यंत
प्रभावशाली होती है जिससे भगवान शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं एवं भक्त को मनोवांछित फल प्रदान
करते हैं।
रुद्राभिषेक दो शब्दों से मिलकर बना है, रूद्र और अभिषेक, रूद्र का अर्थ है दुखों को हरने वाला,
जो कि भगवान शिव के विशेष रूप को दर्शाता है और अभिषेक का अर्थ होता है विभिन्न सामाग्रियों से
स्नान करना।
क्यों किया जाता है रुद्राभिषेक
1. समर्पण भाव: रुद्राभिषेक पूजा भगवान शिव को समर्पित होती है, जो हिंदू धर्म में विशिष्ट
देवता हैं।
2. आध्यात्मिक महत्ता: रूद्राभिषेक में शुक्ल यजुर्वेद के अंतर्गत रुद्राष्टाध्यायी के मंत्रों
से भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है।
3. धार्मिक उन्नति: रुद्राभिषेक भगवान शिव की कृपा, करूणा और आशीर्वाद को प्राप्त करने के
लिए की जाती है, जिसमें धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांसकृतिक उन्नति के साथ आत्मिक विकास,
शांति-समृद्धि, व्यापार का अभ्युदय एवं स्वास्थ्य की रक्षा होती है।
बटुक भैरव पूजा का मुख्य महत्व बड़े संकटों, भय, और बुरी शक्तियों से रक्षा पाना है, जिससे
भक्तों को बल, बुद्धि, यश, धन और स्वास्थ्य प्राप्त होता है। यह पूजा मन को शांत करती है और
चिंता, तनाव व नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करती है,
इसके अलावा, तंत्र-मंत्र बाधाओं से मुक्ति और जीवन में सभी बाधाओं को दूर करने के लिए भी बटुक भैरव की साधना की जाती है।
बटुक भैरव नकारात्मक ऊर्जाओं, बुरी नजर, भूत-प्रेत और अन्य अशुभ शक्तियों से भक्तों की
रक्षा करते हैं।
मनोकामना पूर्ति:
श्रद्धापूर्वक की गई पूजा से भक्तों की मनोकामनाएँ पूरी होती हैं।
आत्मविश्वास और साहस:
बटुक भैरव की कृपा से आत्मविश्वास बढ़ता है और व्यक्ति साहसी व निर्भीक बनता है।
धन और यश की प्राप्ति:
इस पूजा से धन-धान्य, यश और स्वास्थ्य लाभ होता है।
शत्रुओं पर विजय:
ज्ञात या अज्ञात शत्रुओं से भय होने पर बटुक भैरव की साधना शत्रु बाधाओं से मुक्ति दिलाती है।
बगलामुखी पूजन का महत्व शत्रुओं पर विजय पाने, वाद-विवाद और मुकदमों में सफलता प्राप्त करने, भ्रम और नकारात्मक शक्तियों को दूर करने तथा वाक् सिद्धि और मानसिक शांति पाने के लिए होता है। देवी बगलामुखी को 'शत्रुनाश की देवी' और 'पीतांबरा' भी कहते हैं, और उनकी पूजा से व्यक्ति को जीवन में शक्ति, स्थिरता और समृद्धि प्राप्त होती है।
बगलामुखी पूजन के मुख्य लाभ||
1. शत्रु विजय:-
माँ बगलामुखी की उपासना से शत्रुओं का नाश होता है और शत्रुओं से संबंधित सभी कार्यों में विजय प्राप्त होती है।
2. नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा:- मां बगलामुखी की आशीर्वाद एक व्यक्ति के चारों ओर एक आभा के रूप में दिव्य सुरक्षा कवच बनाते हैं, जिससे उसे ब्लैक मैजिक के जादू या बुरी नजर जैसी नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा मिलती है।
मंगला गौरी व्रत के लाभ--
मंगला गौरी व्रत के द्वारा, भक्त इष्ट देवी गौरी की कृपा प्राप्त कर सौभाग्य, सुख, और समृद्धि
का आनंद उठा सकते हैं।
इस व्रत का पूजन करने से पति की लंबी आयु और उनके दिल की इच्छा पूरी होने की कामना की जाती है।
मांगलिक दोष से पीड़ित व्यक्ति को संतान सुख की प्राप्ति हो सकती है और पुत्र संतान की प्राप्ति
में भी सहायक सिद्ध हो सकता है।
इस व्रत के द्वारा, कुमारी कन्याएं एक शुभ वर प्राप्त करने की कामना करती हैं और विवाह हेतु
सौभाग्य प्राप्त करती हैं।
मंगला गौरी व्रत का अनुष्ठान परिवार में एकता और शांति का संरक्षण करता है और परिवार के सदस्यों
के बीच में सद्भाव को बढ़ावा देता है।
गौरी माँ को प्रसन्न करने से भगवान शिव का आशीर्वाद मिलता है और भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी
होती हैं।
ग्रह शांति पूजा हिंदू धर्म में एक विशेष प्रकार की पूजा है, जो नवग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, और केतु) के अशुभ प्रभावों को कम करने, जीवन में सकारात्मकता लाने, और शुभ फल प्राप्त करने के लिए की जाती है। यह पूजा विशेष रूप से उन व्यक्तियों के लिए उपयोगी मानी जाती है जिनकी कुंडली में ग्रह दोष या अशुभ ग्रह योग होते हैं।
ग्रह शांति पूजा का महत्व
नवग्रहों की शांति: जन्म कुंडली में ग्रहों के अशुभ प्रभावों को संतुलित करना।
जीवन में बाधाओं को दूर करना: करियर, स्वास्थ्य, विवाह, धन और अन्य पहलुओं में आने वाली समस्याओं को कम करना।
आध्यात्मिक उन्नति: आत्मा की शुद्धि और मानसिक शांति प्राप्त करना।
शुभ फल प्राप्त करना: सकारात्मक ऊर्जा और भाग्य को बढ़ावा देना।
भगवान शिव शंकर के सबसे प्रभावशाली मंत्र को महामृत्युंजय मंत्र कहा जाता है। यह सबसे शक्तिशाली और अचूक है। कहा जाता है कि मंत्र के प्रभाव से अकाल मृत्यु और अपशकुन के भय से बचने की क्षमता बन जाती है।
त्युंजय मंत्र जिसे व्यापक रूप से त्र्यंबकम मंत्र के रूप में जाना जाता है। कई लोगों के अनुसार, यह माना जाता है कि महा मृत्युंजय मंत्र के जाप से कंपन की निर्मिति होती है जिससे मानव शरीर के अच्छे स्वास्थ्य की सुनिश्चिति और भौतिक शरीर को पुन: उत्पन्न करने में मदद होती है। यह सबसे प्रभावशाली मंत्र है जो दीर्घायु प्रदान करता है, दुर्भाग्य और अप्राकृतिक मृत्यु को टाल देता है। मुख्यतः रूप से यजुर्वेद के भाग के रूप में माना जाने वाला, यह सूक्त भय की समाप्ति का कारण बनता है। हिंदू धर्म में इस महा मृत्युंजय मंत्र जाप का १०८ बार जप करने का अत्यधिक महत्व है। यह चारों ओर की नकारात्मकता (बुराई) समाप्त करता है और सकारात्मकता लाता है।
दुर्गा पूजा का पर्व हिन्दू देवी दुर्गा की बुराई के प्रतीक राक्षस महिषासुर पर विजय के रूप में मनाया जाता है। अतः दुर्गा पूजा का पर्व बुराई पर भलाई की विजय के रूप में भी माना जाता है।
देवी दुर्गा और उनके नौ रूपों की आराधना के लिए साल में चार बार नवरात्रों का आगमन होता है. वैदिक पंचांग के अनुसार दो बार प्रकट नवरात्रि में देवी दुर्गा की आराधना, पूजा पाठ, व्रत आदि किए जाते हैं, तो दो बार गुप्त नवरात्रि में गुप्त रूप से देवी मां की आराधना, व्रत करने का विधान बताया गया है. 9 दिन के नवरात्रों में देवी दुर्गा के नौ रूपों की आराधना करने से जीवन में चल रही सभी समस्याएं खत्म हो जाती हैं और अक्षय फल की प्राप्ति होती है.
देवी स्वर्ग लोक से धरती पर आकर वास करती हैं
मंगल दोष शांति का महत्व यह है कि यह व्यक्ति के जीवन से विवाह, स्वास्थ्य और करियर संबंधी बाधाओं को दूर करता है, साथ ही दांपत्य जीवन में समृद्धि और रिश्तों में सुधार लाता है। इस शांति पूजा से मानसिक और शारीरिक चिंताएं भी दूर होती हैं और जीवन की रुकावटें समाप्त हो जाती हैं। यह पूजा मंगल ग्रह के नकारात्मक प्रभावों को कम कर उसके शुभ प्रभावों को बढ़ाने में मदद करती है।
मंगल दोष के कारण विवाह में आने वाली अड़चनों को दूर करने और विवाह को सफल बनाने के लिए यह पूजा की जाती है।
इसके अलावा, मांगलिक दोष से प्रभावित व्यक्ति के लिए विशिष्ट मंत्रों का जाप और धार्मिक अनुष्ठानों का पालन करना भी आवश्यक माना जाता है।
ज्योतिष के अनुसार, कुंडली चार्ट में काल सर्प दोष का होना शुभ नहीं माना जाता है, लेकिन इसको दूर करने के लिए उपाय किया जा सकता है। आइए सबसे पहले जानते हैं कि कालसर्प दोष क्यों होता है? दरअसल किसी की कुंडली में काल सर्प दोष तब बनता है जब सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरू, शुक्र, शनि ये सभी ग्रह गोचर में भ्रमण करते हुए राहु और केतु के बीच में आ जाते हैं। धर्मशास्त्र के मुताबिक राहु को सर्प के सिर के रूप में जाना जाता है जबकि छाया ग्रह केतु को सर्प की पूंछ के रूप में जाना जाता है।
पितृ दोष शांति का महत्व यह है कि इससे पितरों को तृप्त कर उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, आर्थिक उन्नति होती है, परिवार में सुख-शांति आती है, और संतान सुख भी प्राप्त होता है. सही विधि से पितृ दोष पूजा करने पर जीवन सकारात्मक बनता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है, जिससे जीवन में खुशहाली और समृद्धि का संचार होता है|
पूर्वजों के स्मरण में प्रतिदिन ॐ श्री पितराय नम: तथा ॐ श्री पितृदेवाय नमः का २१ बार जाप करें।
गृह प्रवेश पूजा एक महत्वपूर्ण हिंदू अनुष्ठान है जो नए घर में प्रवेश करने से पहले किया जाता है। आम तौर पर जब व्यक्ति नया घर बनाता है या किसी नए स्थान पर जाता है, तो वहां की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए गृह प्रवेश पूजा की जाती है। यह पूजा घर में सुख, शांति और समृद्धि लाती है। साथ ही यह पूजा नए घर में रहने वाले लोगों के जीवन में खुशहाली और सफलता पाने में मदद करती है। शुभ मुहूर्त में की गई पूजा से घर में निवास करने वालों पर शुभ प्रभाव पड़ता है और उन्हें जीवन में सफलता प्राप्त होती है।
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With over 15+ years of experience in performing Vedic rituals, Pandit Shivesh Sharma is a highly respected priest in the community. Trained under renowned scholars in Varanasi, he brings authenticity and devotion to every puja he performs.
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